गुरुवार, 11 मार्च 2010

कैसी कैसी तकदीरें ?

काम का भारी बोझ कहीं ,
आराम की सारी सोच कहीं |
कहीं राजा , कहीं फकीरें ,
कैसी कैसी तकदीरें ?

कोई हाथ पे लिखा लाया ,
कोई माथे पे छपा लाया |
बनती बिगड़ती तस्वीरें ,
कैसी कैसी तकदीरें |

कहीं ख़ुशी का सूरज न डुबता,
कहीं एक तारा भी न उगता |
कहीं यौवन, कहीं लकीरें ,
कैसी कैसी तकदीरें |

कहीं किसी की चांदी कटती ,
कहीं ता उम्र क़र्ज़ में कटती |
हिसाब ज़िन्दगी , इनाम रसीदें ,
कैसी कैसी तकदीरें |

अक्षत डबराल
"निःशब्द"

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. आपने प्रशंसा की, इसका धन्यवाद |

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