रविवार, 19 जून 2011

क्यों ?

क्यों नैनों की कोई किताब नहीं ?
क्यों सपनों का कोई हिसाब नहीं?
क्यों ज़िन्दगी है एक सवाल हमेशा ?
क्यों इस सवाल का कोई जवाब नहीं ?

क्यों अरमानों का घड़ा न भरता ?
क्यों गुज़रते वक़्त से मन डरता ?
क्यों लगती कुछ कमी हमेशा ?
क्यों बातों से खालीपन झड़ता ?

क्यों टकराते हैं कुछ अहं ?
क्यों कुछ चेहरे न होते सहन ?
क्यों पहने हैं नकाब हमेशा ?
क्यों बजते हैं यूँ जेहन ?

अक्षत डबराल
"निःशब्द"

2 टिप्‍पणियां:

  1. क्यों अरमानों का घड़ा न भरता ?
    क्यों गुज़रते वक़्त से मन डरता ?
    क्यों लगती कुछ कमी हमेशा ?
    क्यों बातों से खालीपन झड़ता ?
    kaun dega jawaab ? aur kyun dega? kya wah nahin in baaton se bhara ?

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