गुरुवार, 21 मई 2009

मिटा दे

कितनी बातें भूलने लायक ,
आज उन्हें सब मिटा दे |
खोद ले यादों की कब्र ,
आज उसमें उन्हें लिटा दे |

काँटा बनकर तेरे दिल में ,
जो कबसे चुभती रही |
विष बनकर तेरे जीवन में ,
जो कबसे घुलती रही |

बोझ बनाकर जिसको तू ,
इतनी दूर ढो चुका |
सताया बहुत है तुझको,
पर अब बहुत हो चुका |

कर एक शुरुवात नई ,
बेडियों को , कह अलविदा दे |
चुन उन यादों को जीवन से ,
आज उन्हें सब मिटा दे |

अक्षत डबराल
"निःशब्द"

2 टिप्‍पणियां:

  1. कर एक शुरुवात नई ,बेडियों को , कह अलविदा दे |
    चुन उन यादों को जीवन से ,आज उन्हें सब मिटा दे |

    अक्षत,
    ये पंक्ति मुझे बहुत अच्छी लगी
    वीनस केसरी

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