बुधवार, 29 अप्रैल 2009

वो दिन

वो दिन , वो दिन भी क्या दिन थे !
पल - पल मस्ती भरे , चिंता के बिन थे |

समय कितना आराम से कटता था |
मन खुशी भरे गीत रटता था |

बहते रहते थे , जैसे कोई अल्हड़ नदी है |
अब लगता इन सबको हुए , बीत गई एक सदी है |

तब लगता था , बस सबसे ऊपर हम हैं |
अपने आगे सब गिनती में कम हैं |

तब हम ख्वाब लिखना , मिटाना जानते थे |
दोस्ती करना , निभाना जानते थे |

छोटी - छोटी बातों की खुशी मनाते थे |
थोड़े से पैसों से पूरा महीना चलाते थे |

याद आते हैं बहुत , पर अब हमसे छिन गए |
न आयेंगे , जितना बुलाओ , अब बीत वो दिन गए |

अक्षत डबराल
"निःशब्द"

1 टिप्पणी:

  1. Dear Dabralji,

    If you don't mind please convert the word वे to वो in your poen, as वो is the most apppropreate word.

    regards,

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